बड़े बदलाव हमेशा छोटी, रोज़मर्रा की आदतों से शुरू होते हैं। आइए जानें कि कैसे हम अपने दफ्तर, घर और यात्रा के दौरान बेहतर संतुलन पा सकते हैं।
भारत में काम के घंटे अक्सर लंबे होते हैं। लगातार लैपटॉप के सामने बैठना, एसी के माहौल में रहना और बीच-बीच में आराम न करना शाम तक शरीर को बुरी तरह थका देता है।
हम अक्सर काम में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी कुर्सी से उठना भी भूल जाते हैं। इससे गर्दन, पीठ और आँखों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।
हर एक या दो घंटे में अपनी कुर्सी से उठें। ऑफिस की बालकनी या खिड़की से बाहर देखें। थोड़ा चलें और पानी पिएं। ये 5 मिनट का ब्रेक आपकी ऊर्जा को फिर से भरने में बहुत मदद करता है।
गर्म मौसम में हम अक्सर पानी पीना भूल जाते हैं। अपने डेस्क पर एक पानी की बोतल रखें। चाय या कॉफी की जगह नींबू पानी या छाछ का विकल्प भी आज़माया जा सकता है। यह शरीर को हल्का रखता है।
लंच के बाद तुरंत कुर्सी पर बैठने के बजाय 10 मिनट की हल्की वॉक करें। इसी तरह रात के खाने के बाद परिवार के साथ छत या बिल्डिंग के नीचे टहलना एक बेहतरीन आदत है।
रोज़ाना बाहर का भारी खाना पचने में मुश्किल होता है। घर की बनी दाल-रोटी या चावल सादे होते हैं और दोपहर के समय आपको सुस्त नहीं होने देते।
दिनभर की भागदौड़ और शहर के ट्रैफ़िक के बाद घर पहुंचना थका देने वाला होता है। इस समय को आरामदेह बनाने के लिए आप कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रख सकते हैं: