काम की व्यस्तता के बीच अपने शरीर और मन को शांत रखने की कला। गतिविधि और विश्राम का सही तालमेल।
शहरों की ज़िंदगी में तनाव होना एक आम बात हो गई है। बाज़ार की भीड़, ट्रैफ़िक का शोर और काम की समय-सीमा (deadlines)—ये सब हमारे मन को थकाते हैं।
संतुलन का मतलब यह नहीं है कि हम काम करना छोड़ दें, बल्कि इसका मतलब यह है कि हम काम के बीच खुद को 'रीसेट' (reset) करने का समय दें। हर दिन खुद के लिए कम से कम 15 मिनट का समय निकालें जहाँ आप कुछ न कर रहे हों।
बस बालकनी में खड़े होना, खुली हवा महसूस करना या चाय का एक प्याला शांति से पीना भी मन को स्थिर कर सकता है।
हमारा शरीर लगातार मशीन की तरह काम करने के लिए नहीं बना है। दिनभर की शारीरिक या मानसिक गतिविधि के बाद इसे आराम की आवश्यकता होती है। जब हम सही समय पर सोते हैं और सप्ताहांत (Weekends) पर अपनी नींद पूरी करते हैं, तो शरीर अपनी प्राकृतिक लय में आ जाता है। स्क्रीन से दूर रहकर परिवार के साथ समय बिताना एक बेहतरीन 'रिकवरी' है।
उठते ही तुरंत फोन चेक करने के बजाय एक गिलास पानी पिएं। कुछ मिनट स्ट्रेचिंग या गहरी साँस लेने से दिन की शुरुआत शांत होती है। हड़बड़ी से बचने के लिए थोड़ा जल्दी उठने का प्रयास करें।
दोपहर के भोजन के बाद अक्सर नींद आती है। भारी भोजन से बचें। लंच के बाद 5 मिनट की चहलकदमी पाचन में मदद करती है और काम पर वापस लौटने के लिए ताज़गी देती है।
रात का समय शरीर को आराम देने के लिए है। घर का हल्का खाना खाएं। सोने का एक निश्चित समय तय करें। अच्छी दिनचर्या का सबसे बड़ा रहस्य एक अच्छी रात की नींद है।